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ग़दर पार्टी (1913-1918) : लहू में भीगी यादें और देशभक्ति का ऐतिहासिक हिन्दी परिप्रेक्ष्य

सक्सेना, प्रदीप

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
इस आलेख में गदर पार्टी के ऐतिहासिक महत्व व औपनिवेशिक व अन्य वजहों से इतिहास लेखन में उसकी उपेक्षा की बात की गयी है। इस सन्दर्भ में एक ऐतिहासिक स्रोतों के रूप में ‘चांद’ पत्रिका के 'फांसी' अंक व 'बलिदान' अंक को रेखांकित किया गया है। शिव प्रसाद वर्मा के क्रान्तिकारी आन्दोलन का वैचारिक विकास के हवाले से ग़दर आन्दोलन का महत्व बताया गया। लेख में बताया गया है कि गदर आन्दोलन राजनीतिक-सामाजिक सुधारों के सवाल पर अपने समकालीनों से आधी सदी आगे था, इसी तरह यह अपने समकालीनों से वैचारिक रूप से सदृढ़ था।

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