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ग़रीबी पढ़ना : एक फ़र्क नज़रिया - भाग 2

बोस, सुकन्या

FormatEbook
Published2015
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
जिस देश में लगभग एक तिहाई लोग ग़रीब हों तो उन्हें नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता। और अब अगर ग़रीबी समझने को स्कूली पाठयक्रम का हिस्सा बनाना है तो उसे देखने का एक नज़रिया भी चाहिए। और यही नज़रिया या दृष्टिकोण यह तय करेगा कि बच्चे ग़रीबी को कैसे देखें।

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