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Cover of पाठ्यपुस्तकों का अस्तित्व

पाठ्यपुस्तकों का अस्तित्व

स्मृति,

FormatEbook
Published2007
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख 'राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा - 2005' के पाँच मार्गदर्शक सिद्धान्तों के आधार पर राजस्थान की तत्कालीन पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करता है। लेख बताता है कि ज्ञान को स्कूल के बाहरी जीवन से जोड़ने; रटन्त पढ़ाई से मुक्ति; विद्यार्थी के चहुँमुखी विकास का अवसर मुहैया कराने; परीक्षा को लचीला बनाने और कक्षा की गतिविधियों से जोड़ने तथा प्रजातांत्रिक राज्य व्यवस्था के अन्तर्गत राष्ट्रीय चिन्ताओं को समाहित करने वाली पहचान का विकास जैसे मानकों पर ये पुस्तकें खरी नहीं उतरती हैं।

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