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शिक्षकों की फ़िक्र और देखरेख द्वारा एक स्कूल का रूपान्तरण
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इस आलेख में लेखिका इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि बच्चों को कुछ भी सीखने में समर्थ बनाने और उनके सम्पूर्ण विकास में सहयोग देने के लिए सामाजिक और भावनात्मक रूप से सहायक व प्रेरक वातावरण सबसे पहली ज़रूरत होती है। यहाँ वे कन्नड़ा बॉयज़ स्कूल (केबीएस), विजयपुरा के बच्चों के अनुभवों और बेहद कठिन स्थितियों के बीच उन्हें भावनात्मक सहारा देने के लिए उनके शिक्षकों के रचनात्मक व सकारात्मक प्रयासों के बारे में बतलाती हैं। यह प्रयास न केवल उनकी पढ़ाई के लिए बल्कि उन्हें परिपक्व व आत्मनिर्भर वयस्क बनाने के लिए भी ज़रूरी हैं।
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