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विकास व्यवस्था के शिकार आदिवासी : संरक्षात्मक भेदभाव का मसला
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About this book
लेख अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण पर केन्द्रित है। आरक्षण कोटे को लागू करने की कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए लेखक का मुख्य प्रश्न है कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आरक्षण का अनुपात जनसंख्या उचित ठहराया जा सकता है? क्या जाति के भीतर जाति की अवधारणा को लागू करते हुए आरक्षण का अनुपात नहीं बढ़ाया जा सकता है? इसके आलावा लेख में आरक्षण को लागू करने की ज़मीनी समस्याओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है।