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भारत में विद्यालय स्तर पर कृषि शिक्षा की प्रासंगिकता
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About this book
यह पर्चा भारत कृषि शिक्षा की विकास यात्रा पर है। स्वतंत्रत पूर्व के समय की झलक से शुरू करते हुए पर्चा इक्कीसवीं सदी के परिदृश्य तक लाता है। लेखिका विद्यालयी स्तर पर शैक्षिक पाठ्यक्रम में कृषि शिक्षा के प्रति उदासीनता के प्रति चिन्ता जाहिर करती हैं। वे इस तथ्य पर विचार करती हैं कि कृषि प्रधान देश होते हुए भी भारत के शिक्षा पाठ्यक्रमों से कृषि बाहर क्यों है? विश्लेषण करते हुए वे इसके कारणों की पड़ताल करती हैं। साथ ही भारत में कृषि को शिक्षा में शामिल करने के प्रयासों को सूचीबद्ध भी करती हैं। पर्चा माँग करता है कि कृषि शिक्षा को ज़्यादा सार्थक व सार्वभौमिक बनाया जाए।
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