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व्यवस्था में गतिरोध

शास्त्री, प्रकाश

FormatEbook
Published1981
LanguageHindi
ReadingIncluded
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About this book
यह लेख भारतीय राज-व्यवस्था में विकसित होती भारतीय संस्कृति पर बुद्धिजीवियों द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों को रेखांकित करता है। लेखक भारतीय राज-व्यवस्था के निर्माण में 1975 के आपातकाल को गतिरोध के रूप में देखते हुए, बताता है कि कैसे विभिन्न विचारधाराएँ व्यवस्था में आए बदलावों को अपने-अपने पक्ष के साथ प्रस्तुत करती हैं। लेखक ने शासन के विदेशी मॉडल्स के प्रति इन्दिरा गाँधी की धारणाओं की चर्चा करते हुए आपातकाल और लोकतंत्र के नए प्रतिमान पर अपने विचार रखे हैं। लेख में आग्रह है कि यदि कोई व्यवस्था समस्या समाधान में निष्प्रभावी होने लगे तो यथास्थिति बनाए रखने की अपेक्षा उसे प्रासंगिक बनाने का प्रयास ज़रूरी है।

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