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पढ़ना बिना अर्थ के : भारतीय कक्षाओं की दुविधा

सिन्हा, शोभा

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख भाषा शिक्षण में अर्थ निर्माण के महत्त्व को रेखांकित करता है और उसके विभिन्न पहलुओं, ख़ासकर पूर्वज्ञान के उपयोग की चर्चा करता है। यह देखते हुए कि भारतीय स्कूली विद्यार्थी खुद कोई पाठ्यवस्तु पढ़कर समझने में कठिनाई महसूस करते हैं, लेखिका प्राथमिक कक्षाओं में किए गए अध्ययनों के आधार पर कहती हैं कि उनमें वर्णमाला याद करने और शब्दांश पर ज़ोर है न कि अर्थ समझने में। माध्यमिक स्तर पर भी स्वयं विद्यार्थी पाठ्यवस्तु पढ़कर समझें, इस पर ज़ोर नहीं है। लेख का आग्रह है कि प्राथमिक स्तर से ही पाठ्यवस्तु को समझने और उस पर विचार करने पर ज़ोर हो।

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