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भारतीय न्यायिक व्यवस्था की घटती विश्‍वसनीयता

विजय, शिल्पा

FormatEbook
Published2011
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
न्यायपालिका पर चर्चा करते हुए लेख उसकी कार्यपद्धति और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार की आलोचना करता है। राजनीतिक मामलों में तेज़ी दिखाने वाली न्यायपालिका आम नागरिकों के मामले में सुस्त अथवा निष्क्रिय मालूम होती है। आम नागरिक के लिए न्याय की भूमिका और न्यायालय की विश्‍वसनीयता बहुत महत्त्वपूर्ण है। ऐसे में न्यायाधीशों का भ्रष्टाचार में लिप्त होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेख भ्रष्टाचार के कई मामलों की चर्चा करते हुए न्यायपालिका को जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने के लिए कुछ सुझाव भी पेश करता है।

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