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क्या चिन्तन का कोई भारतीय तरीक़ा है? : एक अनौपचारिक निबन्ध

रामानुजन, ए. के.

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
चिन्तन की भारतीयता और भारतीय चिन्तन परम्परा की पड़ताल करना इस निबन्ध के केन्द्रीय मुद्दे हैं। भारतीय सोच पश्‍चिमी सोच, पाखण्ड, असंगति और सन्दर्भ-संवेदनशीलता से किस प्रकार अलग है और क्या इसके मूल में एकता है? लेखक का सवाल है कि 'क्या चिन्तन का कोई (एक) भारतीय तरीक़ा है'? इसके पूछने के कई तरीक़े हो सकते हैं और जवाब भी अनेक हो सकते हैं। लेखक यहाँ न सिर्फ़ इस सवाल का जवाब खोज रहा है, बल्कि सम्भावित जवाबों को खोजने का एक मॉडल विकसित कर रहा है, जिससे पाठक अपने-अपने तरीक़े से इस सवाल के स्थानीय जवाब खोज सके।

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