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पूँजीवाद एक प्रेतकथा

रॉय, अरुन्धती

FormatEbook
Published2012
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
एक ओर तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दूसरी तरफ़ अमीरी और अभाव के बीच बढ़ती हुई खाई। अपने प्रवास वर्णन के बहाने पूँजीवाद द्वारा निर्मित आर्थिक ही नहीं, मानसिक और प्रकृति से मानवीय सम्बन्धों को जिन स्तरों पर प्रभावित किया है, उसे लेखिका ने रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। इस परिप्रेक्ष्य में लेखिका ने जनकल्याणकारी राज्य, ट्रिकल डाउन सिद्धान्‍त, मध्यवर्ग का भ्रम, कॉर्पोरेट-सोशिएल रिस्पॉन्सेबलिटी की सच्चाई आदि की प्रतीकों के ज़रिए समीक्षा की है। यह लेख हमारे समाज एवं व्यवस्था की तीखी आलोचना पेश करता है।

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