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आरक्षण से दलितों का जीवन सुधरा

घिवरिया, मोहनलाल

FormatEbook
Published2008
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख एकलव्य के मिथक को गुरु-भक्ति के प्रमाण के रूप में प्रचलित करने का विरोध करता है। लेखक के अनुसार यह गुरु-भक्ति का प्रमाण नहीं बल्कि ब्राह्मणवादियों और द्रोणाचार्य का क्रूर षड्‌यंत्र था और भारतीय संस्कारों जैसी क्रूरता अन्यत्र कहीं नहीं है। इस क्रूरता को निरन्तर चल रही एक परम्परा के तौर पर देखते हुए वह इसे आरक्षण विरोध से जोड़ता है। लेखक मानता है कि आरक्षण विरोध के ज़रिए दलितों को शिक्षा और संसाधनों से दूर करने की कोशिश उसी ब्राह्मणवादी मानसिकता का परिणाम है।

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