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गाँधी चिन्तन और कर्मण्यता (उदारवादी एवं उग्रवादी विचारों का समन्वय)

वर्मा, सुरेन्द्र

FormatEbook
Published2010
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख उदारवादी और उग्रवादी राजनीति के साथ गाँधी के सम्बन्धों की व्याख्या करता है। लेख बताता है कि गाँधी के जीवन दर्शन को उदारवादी गोपाल कृष्ण गोखले से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। अपनी समानताओं के बावजूद दोनों की प्राथमिकताएँ बिलकुल अलग थीं। तकनीक और विज्ञान के उलट धर्म और अध्यात्म गाँधी के जीवन दर्शन को गढ़ने वाली मुख्य शक्ति थी। इसके साथ ही उनकी भूमिकाओं अथवा नीतियों में आने वाले परिवर्तनों के सामाजिक-राजनीतिक कारणों पर भी लेखकों ने प्रकाश डाला है।

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