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रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन

श्रीदेवी, सिन्धु

FormatEbook
Published2014
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
प्रस्तुत आलेख में लेखिका द्वारा अपने पढने-पढ़ाने के अनुभव साझा करते हुए सीखने के परिणामों में सुधार लाने के लिए एक टूल के रूप में, आकलन की बढ़ती महत्ता पर ज़ोर दिया गया है। इसके अन्तर्गत रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन के सन्तुलित उपयोग को अधिगम के लिए एक महत्त्वपूर्ण साधन बताया गया है। अपनी कक्षा में रचनात्मक आकलन का प्रयोग करते हुए लेखिका द्वारा बच्चों के सीखने में आने वाली दिक़क्‍़तों, उससे निपटने वाली प्रकियाओं आदि से एक शिक्षक को अवगत करवाने में आकलन के महत्त्व को रेखांकित किया गया है।

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