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गणित की प्रकृति

त्यागी, शीतल प्रसाद

FormatEbook
Published2003
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख गणित को विज्ञान की तरह समझने, रोज़मर्रा के काम में उपयोगी होने और उसके अधिगम को रोचक बनाने जैसे आग्रहों का विश्लेषण करता है। गणित सम्बन्धी वैचारिक परम्पराओं और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करता हुआ यह लेख सीमाओं से 'परे जाने' को गणित की मूल शक्ति मानता है।

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