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बाल साहित्य के बिना अधूरी है बच्चों की शिक्षा

सिंह, गुरबचन

FormatEbook
Published2021
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
पाठशाला पत्रिका की संवाद शृंखला की पाँचवीं परिचर्चा में संवाद का विषय था— ‘बाल साहित्य के बिना अधूरी है बच्चों की शिक्षा।’ इस संवाद में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में बाल साहित्य का उपयोग करने वाले स्कूली शिक्षा व बाल साहित्य के लेखन, सम्पादन व प्रकाशन से जुड़े व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सहभागियों ने अच्छे बाल साहित्य के साथ यह भी बताया कि बच्चों के व्यक्तित्व को गढ़ने में बाल साहित्य किस तरह की भूमिका निभाता है और शिक्षा में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका क्यों होनी चाहिए।

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