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सौजन्यता-चुनौतियों के बावजूद : एक बहन के उद्गार

रघुनाथ, प्रेमा

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख एक बहन का, अपनी विकलांग बहन के बारे में संस्मरण है। यह उस भ्रम और चिन्ता की बात करता है जब परिवार में एक छोटे सदस्य के विकलांगता से ग्रस्त होने का पता चलता है। इस स्थिति में माता-पिता को विकलांग बच्चे पर अधिक ध्यान देना पड़ता है और भाई-बहनों को कम उम्र में ही अधिक ज़िम्मेदारियाँ उठानी पड़ती हैं। इस स्थिति में समाज और मित्र मण्डली द्वारा बहिष्कार के साथ-साथ उनमें उदासी, चिड़चिड़ापन और व्यवहार के नए पैटर्न भी दिखाई दे सकते हैं। लेकिन यह स्थिति प्रेम, देखभाल और परिपोषण की भावना को भी बढ़ावा देती है।

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