Home › Science › दास्तान-ए-राजनीतिशास्त्र
दास्तान-ए-राजनीतिशास्त्र
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
इस आलेख में लेखिका ने कॉरपोरेट भूमण्डलीकरण के दौर में जब नारीवाद; पर्यावरणवाद और दलित आन्दोलनों की वजह से राजनीति के दायरे के विस्तार व उनसे उपजे सवालों को एक अनुशासन के रूप में राजनीतिशास्त्र द्वारा नहीं उठा पाने की बात की गयी है। इसकी अपर्याप्तता के कारणों की पड़ताल करते हुए राजनीतिशास्त्र (भारत में) के सत्ता के चरित्र; सत्ता व ज्ञान व्यवस्था के अन्तगुर्फन व राजनीतिशास्त्र के सिद्धान्त के पाश्चात्य विन्यास जैसे सवालों का हल निकालने से बचने की बात करती हैं। इसका समाधान वे अन्तर व बहु-अनुशासनिकता से अलग नयी परिभाषा के ज़रिये निकालने की बात करती हैं।
More in Science
Browse all →
De kleine Johannes
Frederik van Eeden
Sylvie and Bruno
Lewis Carroll
30 Strange Stories
H. G. (Herbert George) Wells
The Man Whom the Trees Loved
Algernon Blackwood
Tales of Three Hemispheres
Lord Dunsany
The Purple Cloud
M. P. (Matthew Phipps) Shiel
The Wolf's Long Howl
Stanley Waterloo
Town Geology
Charles Kingsley