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विषाणु : उधार की ज़िन्दगी या फिर जैव-विकास के अनोखे खिलाड़ी

खांबेटे, चेतना

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
आम तौर पर हम वायरस के बारे में ज़्यादा सोच-विचार नहीं करते। लेकिन इस बार कोविड-19 जो कोरोना नाम से ज़्यादा जाना जाता है – ने वायरस के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। कहने को वायरस अपने आप प्रजनन नहीं कर सकता किन्तु जब यह एक अतिसम्वेदनशील कोशिका को संक्रमित करता है तो उस कोशिका को अधिक वायरस उत्पन्न करने के लिए निर्देशित कर सकता है। मुख्य रूप से, वायरस संसर्ग प्रभाव के कारण प्रतिष्ठित है। बीमारी और मृत्यु की व्यापक घटनाओं में इस तरह की प्रतिष्ठा पर कोई सन्देह नहीं है। हालाँकि, वायरस निश्‍चित रूप से वैज्ञानिकों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए शत्रु हैं, परन्तु ये कई शोधकार्य में महत्त्वपूर्ण रहे हैं जैसे प्रोटीन संश्लेषण, बुनियादी सेल्युलर प्रक्रियाओं की समझ इत्यादि को समझने में।

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