Home › Science › जनतंत्र और जनवाद के बीच : कुछ सैद्धांतिक सवाल
जनतंत्र और जनवाद के बीच : कुछ सैद्धांतिक सवाल
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख जनतांत्रिक ताने-बाने में बसे जनवाद और उससे उपजे आन्दोलनों का जायज़ा लेता है। अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में उठे जन-उभार के बहाने लेखक ने कई आन्दोलनों की वैचारिक और सैद्धान्तिक मंशाओं को खंगालने का प्रयास किया है। किस तरह कोई आन्दोलन जनतंत्र को मज़बूत करने के साथ-साथ उसके द्वारा मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए अपने अधिकारों को प्रस्तुत करने और प्रश्नों को उपस्थित करने का मंच प्रदान करता है। आन्दोलन में कार्यरत लोग सिर्फ़ भीड़ का हिस्सा न होकर जनता के रूप में उपस्थित होते हैं, इसे समझने के लिए एक सैद्धान्तिक ढाँचा देने का प्रयास इस लेख में देखा जा सकता है। आवाज़ उठाने और आन्दोलन करने में जो अन्तर है, वह इस लेख में कई उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट होता है।
More by निगम, आदित्य
Browse all →More in Science
Browse all →
The Purple Cloud
M. P. (Matthew Phipps) Shiel
The Mason-Bees
Jean-Henri Fabre · Alexander Teixeira de Mattos
New Atlantis
Francis Bacon
Zanoni
Edward Bulwer Lytton, Baron Lytton
Eurasia
Christopher Evans
Aeroplanes
James Slough Zerbe
De kleine Johannes
Frederik van Eeden
A Bilateral Division of the Parietal Bone in a Chimpanzee; with a Special Reference to the Oblique Sutures in the Parietal
Aleš Hrdlička