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भारत में प्राक्-इतिहास की निरंतरता

कोसम्बी, दामोदर धर्मानन्द

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस आलेख में लेखक ने प्राक् इतिहास लेखन की सीमाओं का उल्लेख करते हुए ऐतिहासिक निरन्तरता की वजह से आदिम समाज के महत्व की चर्चा की है। उन्होंने खान-पान; रीति-रिवाज व कर्मकाण्ड के ऐतिहासिक स्रोत के रूप में इस्तेमाल इस बारे में ऐतिहासिक स्रोतों के रूप में पेश किया है। अग्‍निपरीक्षा; प्रजनन कर्मकाण्ड; पण्ढरपुर यात्रा की उल्लेख करते हुए खेतिहर, पशुपालक व आदिवासी समाजों के रीति-रिवाज़, कर्मकाण्ड व आपसी रिश्ते के तुलनात्मक शोध का प्राक्-इतिहास लेखन में उपयोग की बात की है। म्हतोबा; जोगाबाई के पूजा, कर्मकाण्ड के सहारे उन्होंने यह कहा है कि आदिम व पृथ समाज पर सार्वभौम प्रथा थोपना उचित नहीं है।

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