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भाषा जो बच्चे घर से लेकर आते हैं

मोहन पाण्डेय, मदन

FormatEbook
Published2019
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
बच्चे अपने घर में बोली जाने वाली भाषा के साथ स्कूल में प्रवेश लेते हैं। स्कूल में न तो इस भाषा के लिए जगह होती है और न ही बच्चे की उन योग्यताओं के लिए जिन्हें बच्चे ने अपनी इस घरेलू भाषा के माध्यम से अर्जित किया है। लेख बच्चों की अपनी भाषा और उनके द्वारा इसमें अर्जित भाषायी योग्यताओं के विभिन्न उदाहरण देते हुए कहता है कि बच्चे की इन बुनियादी भाषायी योग्यताओं, चाहे ये मौखिक ही क्यों न हों, को दरकिनार कर उन्हें भाषा सीखने-सिखाने की बात करना उचित नहीं है।

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