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गैर-बराबरी की अदृश्य पाठशाला कर्म-फल का सिद्धान्त

चतुर्वेदी, नन्द

FormatEbook
Published2008
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
प्रत्यक्ष रूप से कोई ऐसी पाठशाला नहीं है जहाँ ग़ैर-बराबरी की शिक्षा दी जाती हो। इसके बावजूद समाज में व्यापक तौर पर भेदभाव दिखाई देता है। यह लेख उस अदृश्य पाठशाला को खोजने का प्रयास करता है जो इस काम को अन्जाम देती है। लेखक भाग्य और कर्म आदि की पारम्परिक धारणाओं को इसका बुनियादी कारण मानते हुए अपना विवेचन पेश करते हैं। उनके अनुसार यही धारणाएँ अनजाने में हमारे भीतर भेदभाव करने और स्वीकारने को बढ़ावा देती हैं। चूँकि अगर सब ईश्‍वरीय है और भाग्य कर्मों से जुड़ा हुआ है तो फिर ग़ैर-बराबरी एक न्यायसंगत व्यवस्था का अंग बन जाती है।

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