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आचार्य से सेवा प्रदाता की भूमिका : एक अन्‍तहीन यात्रा

कुमार, राजेश

FormatEbook
Published2018
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख के मार्फत लेखक हमसे शिक्षकों के बारे में अपनी हालिया समझ पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं। वे बताते हैं कि पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के निर्माण में शिक्षण समुदाय की प्रामाणिक और सार्थक भागीदारी की कमी इस बात की पुष्टि करती है कि शिक्षक ऐसे कार्यनिर्वाहक बनकर रह गए हैं जिन्हें शिक्षातंत्र की इच्छाओं और आदेशों को पूरा करना है और इससे शिक्षक की स्वायत्तता नष्ट हो रही है। अगर वास्तव में हम चाहते हैं कि शिक्षक कार्यकुशल और प्रभावी हों तो हमें यह स्पष्ट करना होगा हम शिक्षक को किस भूमिका में रखना चाहते हैं।

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