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प्रजातंत्र में हम और वे

मेहता, जगत एस.

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख आज़ादी के समय देखे गए सपनों के साथ मौजूदा भारतीय व्यवस्था और राजनीति की तुलना करता है। लेख भारत के बनने-बिगड़ने को दर्शाते हुए उसके सोचने-समझने और कार्यरत होने को दर्ज करता है। राजनीति और नौकरशाही का चारित्रिक बदलाव, चुनावी प्रक्रिया और व्यवस्था पर जनता के विश्‍वास की चर्चा करते हुए लेख प्रजातांत्रिक व्यवस्था के वास्तविक अर्थ और जनप्रतिनिधियों के उत्तरदायित्व को बताता है।

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