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पर्सनल इज़ पॉलिटिकल
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About this book
अपनी आलोचना और आलोचकों को अनदेखा करना या उसे व्यक्तिगत मामला बताकर उसकी महत्ता पर ही प्रश्न चिह्न लगा देना, यह सत्ता के चरित्र में निहित है। यह लेख इसी तरह के एक मामले की जाँच पड़ताल करता है। जब स्त्रियों ने अपने जीवन में भोगे गए यथार्थ को पेश करना शुरु किया तो पुरुषसत्ता मानसिकता के लोगों ने उन्हें ‘निजी मामले’ कहकर नारीवाद के लिए गौण महत्ता के कहना शुरु कर दिया। यह लेख नारीवाद के सैद्धान्तिकरण में व्यावहारिकता के अभावों की खोज करते हुए इससे जिरह करता है।