Home › Literature › नारीवाद के मायने
नारीवाद के मायने
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
नारीवाद के वैश्विक ‘फ़िनोमेना’ बन जाने के बावजूद इसको लेकर कई ग़लतफ़हमियाँ, पूर्वाग्रह और आधी-अधूरी समझ मौजूद है। लेख में न केवल इनका उल्लेख है, बल्कि उन्हे सुधारने की कोशिश भी साफ़ दिखाई देती है। साथ ही लेख में नारीवाद को फ़ैशन, पुरुषों का विरोध, स्त्रियों का विद्रोह मानने जैसी ग़लतफ़हमियों को भी दूर करने का प्रयास किया गया है। लेख घोषणाओं और सिद्धान्तों से हटकर व्यावहारिकता पर बल देता है और नारीवाद के अर्थ को इसी रूप में समझाता है।