HomeScience › सिद्धान्त का कर्म : परम्पराओं के आर-पार चिन्तन

Cover of सिद्धान्त का कर्म : परम्पराओं के आर-पार चिन्तन

सिद्धान्त का कर्म : परम्पराओं के आर-पार चिन्तन

पाण्डेय, राकेश

FormatEbook
Published2019
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
प्रस्तुत लेख में लेखकों ने सिद्धान्त के साथ हमारे सम्बन्धों की प्रकृति की पड़ताल करते हुए बताया है कि हमें एक ऐसी सैद्धान्तिक रचना की ज़रूरत है जो आत्म-चेतन होने के साथ एक नए दृष्टि-विज्ञान के प्रकाश से भी लैस हो। सिद्धान्त को उसकी दैवी ऊँचाई से उतारकर सामान्य जीवन और चिन्तन के साथ जोड़ने की ज़रूरत भी लेखक-त्रय महसूस करते हैं। इसी सन्दर्भ में गाँधी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के योगदानों की चर्चा करते हुए उनकी आधुनिकता पर बात करते हुए पश्‍चिमी और भारतीय परम्पराओं के आर-पार जाने का साहस लेखक रेखांकित करते हैं।

More in Science

Browse all →