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अनुभव, स्थान और न्याय

गुरु, गोपाल

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस आलेख में स्थान व अनुभव की प्रकृति उनकी संरचना उनके आपसी गत्यात्मक रिश्ते व सामाजिक न्याय पर उसके प्रतिफल की चर्चा है। सांस्कृतिक निर्मिति के रूप में स्थान किस तरह अनुभव सत्तामीमांसा व सम्प्रभुता संरचना को प्रभावित करता है इसका विश्लेषण है। भारतीय सन्दर्भ में गाँधी व अम्बेडकर के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से समझाया गया है कि दोनों के अनुभव की भिन्‍नता ने किस तरह से उनके भारत की अवधारणा को तय किया व उनकी सामाजिक-राजनीतिक रणनीति को तय किया। पारम्परिक सामाजिक शक्तियों ने आधुनिकीकरण व शहरीकरण से किस तरह तालमेल कर स्थान व अनुभव को प्रभावित किया है।

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