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बिना ब्याह बच्चे जनो, बच्चों की संरक्षक बनो

जैन, अरविन्द

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख ‘वैध सन्तान’, ‘अवैध सन्तान’, ‘क़ानूनी अभिभावक’, ‘प्राकृतिक संरक्षक’ जैसे क़ानूनी और सामाजिक पेचीदा विषयों पर टिप्पणी करता है। लेखक ने अपने समय के क़ानूनों के पीछे छिपी दकियानूसी परम्पराओं को आलोचना के घेरे में लिया है। लेखक यहाँ क़ानूनी असमानताओं और लैंगिक भेदभाव को उदाहरणों के रूप में पेश करते हुए भारतीय विधि व्यवस्था में उत्तराधिकारी बनने की प्रक्रिया में मौजूद सामन्तवादी मानसिकता को पेश करते हैं।

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