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भ्रष्टाचार : समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य
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भ्रष्टाचार के उदय और प्रसार की प्रक्रिया का वस्तुपरक अध्ययन पेश करने वाली सामग्री का अभाव है। सरकारी आँकड़े और निरीक्षकों की रपटें इस कमी को पूरा नहीं कर सकतीं। समाज विज्ञान को इसके अध्ययन के लिए नई तकनीक का विकास करना होगा। सर्वेक्षण की पद्धति इसके लिए उपयुक्त नहीं रह गई है। लेख में इस कमी की भरपाई की ईमानदार कोशिश की गई है। भ्रष्टाचार में एक से ज़्यादा व्यक्ति शामिल होते हैं, जिसे गोपनीयता की आड़ में किया जाता है। भ्रष्टाचार के कई आयाम हैं। इनसे जुड़े अनेक प्रश्न अनुत्तरित हैं। लेख जवाब ढूँढ़ने की कोशिश करता है।