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दिल माँगे मोर : समकालीन भारत में हिंग्लिश के सामाजिक और सांस्कृतिक सन्दर्भ

ओर्सीनी, फ्रे़चेस्का

FormatEbook
Published2015
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख भाषा के सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भों के साथ राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को प्रस्तुत करता है। आज़ादी के बाद उदारीकृत और निचली जातियों की दावेदारी वाले भारत में हिन्दी और अँग्रेज़ी के बीच की सीमाबन्दी लचीली हुई है। इसका नतीजा 'शुद्ध हिन्दी' तथा 'ब्रिटिश/शुद्ध अँग्रेज़ी' की पकड़ के कुछ ढीले होने में निकाला है। बेशक अँग्रेज़ी अब भी स्थानीय और वैश्‍विक सन्दर्भों में वृहत्तर सम्भावनाओं की भाषा है और ऐसा होना जारी है, लेकिन निचली जातियों के राजनीतिकरण और साक्षरता के चलते हिन्दी का लोकवृत्त बड़ा हुआ है। यह लेख इस जागरण और भाषायी चेतना को जोड़कर देखता है।

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