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निरर्थक के लिए स्‍थान बनाना

राजनारायण, मालविका

FormatEbook
Published2017
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में लेखिका मानती हैं कि कला जीवन का अभिन्न अंग है और इसे अधिगम के एक महत्त्वपूर्ण तरीक़े के रूप में देखा जाना चाहिए। कला हमें प्रश्न पूछने और हमारी मौजूदा धारणाओं को बदलने में सहायता कर सकती है, ताकि हम उसे दूसरों के साथ साझा कर सकें। वे चाहती हैं कि कक्षा में बच्चों की ऊर्जा को एक ऐसी दिशा की ओर बढ़ाया जाए जिससे वे उसका प्रयोग अपनी रुचि की गतिविधियों या विचारों के विकास में कर सकें और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कार्य करने के लिए तैयार हो पाएँ।

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