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रैगिंग और वर्चस्वी पौरुष

Unknown author

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
पिछले कुछ वर्षों में शिक्षण-संस्थानों में रैगिंग एक गम्भीर समस्या के रूप में सामने आई है । प्रस्तुत लेख इसी मुद्दे पर केन्द्रित है। इस विषय पर विस्तृत समझ बनाने हेतु, रैगिंग के पीछे निहित मनोवैज्ञानिक कारणों, मर्दानगी की अवधारणा, इसका रैगिंग से सम्बन्ध और रैगिंग की प्रक्रिया पर उपलब्ध विभिन्न शोधों को लेख की विषयवस्तु के रूप में सम्मिलित किया गया है। लेख में रैगिंग से जुड़े कई समाजशास्त्रीय पहलुओं के साथ इसके सांस्कृतिक-पारम्परिक जड़ों को भी तलाशने की कोशिश की गई है।

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