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किशोर बालिका : एक समझ

पाल, प्रीतम

FormatEbook
Published1998
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
प्रस्तुत लेख किशोर अवस्था में बालक-बालिकाओं के जीवन में होने वाले शारीरिक व मानसिक बदलावों पर चर्चा करता है। लेख में मुख्यतौर पर बालिकाओं पर बढ़ते सामाजिक व पारिवारिक दबावों को दर्शाया गया है। लेख में शिक्षक-प्रशिक्षण की मदद से औपचारिक शिक्षा में इन पहलुओं के प्रति संवेदनशील नज़रिया विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। लेख बताता है कि जयपुर की बस्तियों में काम कर रही कुछ संस्थाओं के अनुभव किशोर बालिकाओं की स्थिति समझने में मददगार हो सकते हैं।

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