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बात केवल बैडमिंटन की ही नहीं है!

मुटाटकर, अदिति

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख, लेखिका के बैडमिंटन खिलाड़ी बनने के सफ़र और उससे जुड़ी दिनचर्या के अनुभव को साझा करता है। वे बतलाती हैं कि खेल का अर्थ केवल जीत या हार नहीं है बल्कि जीने का एक सलीक़ा है। वे खेल सम्बन्धी चोटों के लिए पर्सनल ट्रेनर की ज़रूरत को भी रेखांकित करती हैं। साथ ही वे बच्चों से जिन्दगी के हर पल को भरपूर जीने एवं अपनी समस्याओं के समाधान ढूँढ़कर ईमानदारी के साथ उसके लिए काम करने का आग्रह भी करती हैं।

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