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वर्णाश्रमी असभ्यता

राय, विभूति नारायण

FormatEbook
Published2005
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सभ्यता को समाज सापेक्ष बताते हुए लेख ऐसे मूल्यों की बात करता है जो किसी समाज को सभ्य बनाते हैं। वर्ण व्यवस्था को श्रम का अवमूल्यन करने वाली अपरिवर्तनीय और ठोस व्यवस्था बताते हुए लेख उसके शिक्षा विरोधी चरित्र को बताता है। एक सभ्य समाज के लिए शिक्षा की अनिवार्यता पर ज़ोर देते हुए लेखक वर्ण व्यवस्था से छुटकारे को भारत की प्रगति के लिए ज़रूरी मानता है।

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