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बड़े विभाजन को पाटते हुए

पडकी, विजय

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख विज्ञान और कला के विभाजन के बारे में चर्चा करता है व टैगोर के दृष्टिकोण से इस पर रौशनी डालता है। यह साहित्य शिक्षण की औपनिवेशिक प्रक्रिया के प्रभाव को नाटक के एक अंश द्वारा प्रस्तुत करता है। लेख में देशीय ज्ञान व्यवस्थाओं के महत्त्व व आनुभविक ज्ञान-आधार के दस्तावेज़ीकरण को रेखांकित करते हुए विज्ञान-प्रौद्योगिकी व कला-विज्ञान दोनों की विश्वदृष्टि की चर्चा की गई है। यह ज्ञान निर्माण के समावेशी नज़रिए को प्रस्तुत करता है और स्कूली पाठ्यचर्या में थियेटर गतिविधियों के महत्त्व को बताता है।

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