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बृहस्पति के पैरों वाले कीडे

विद्या भवन शिक्षा संदर्भ केंद्र,

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में, जीन आइचिसन की किताब ‘द आर्टिकुलेट मैमल’ के एक लेख ‘सेलेस्टियल अनइनटेलिजिबिलिटी’ के कुछ हिस्सों को दिया गया है। लेख भाषा विकास एवं सृजन के सन्दर्भ में चॉमस्की की परिकल्पना को प्रस्तुत करता है। लेख दर्शाता है कि भाषा में नए वाक्यों व विमर्श का सृजन यांत्रिक ढंग से कुछेक शब्दों, वाक्यों अथवा नियमों को याद करके नहीं किया जा सकता। भाषा के वे सभी नियम जो एक भाषा को उपयोग करने वाला नैसर्गिक तौर पर जानता है, उनको निरूपित करना आसान नहीं है। माने, ‘भाषा जानना’ और ‘भाषा के बारे में जानना’ ये दो अलग बातें हैं।

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