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नज़रिया अपना-अपना

यदुवंशी, ललिता

FormatEbook
Published2018
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में लेखिका इस बात पर ज़ोर देती हैं कि दुनिया देखने का हर इन्सान का अपना एक नज़रिया होता है। नज़रिया हमारी सफलता पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकता है, बशर्ते कि वह सकारात्मक और तर्कपूर्ण हो। लेखिका इसी बात से जुड़ा एक डायरी अनुभव साझा करती हैं, जिसमें बच्चों ने किसी एक सन्दर्भ के बारे में एक-दूसरे की बातों को सुना, अपने विचारों को रखा जिससे उन्हें अन्य बच्चों के नज़रिए को समझने का मौक़ा मिला।

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