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हिन्दी : विमर्श की भाषा बनाने की चुनौतियाँ

प्रियदर्शिनी, मुकुल

FormatEbook
Published2018
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख विमर्श की हिन्दी के विकास को प्रभावित करने वाले कारणों और चुनौतियों की पड़ताल व विश्लेषण करता है। यह हिन्दी क्षेत्र का दायरा व इसकी भाषायी विविधता की पहचान करते हुए, हिन्दी भाषा को सभी सन्दर्भों में बरते जाने की प्रासंगिकता को उजागर करता है। लेख में हिन्दी के विकास को प्रभावित करने वाले सैद्धान्तिक, व्यावहारिक, सरकारी, गै़र-सरकारी सभी प्रकार के कारणों की पड़ताल की गई है। लेख पत्रकारिता, अकादमिक और जनान्दोलनों की हिन्दी के अलग-अलग स्वरूपों की व्याख्या करते हुए हिन्दी को अकादमिक से लेकर बाज़ार तक के विमर्श की भाषा बनने की चुनौतियों का गहरा विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

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