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कविता की सप्रसंग व्याख्या

कुमार, मनोज

FormatEbook
Published2023
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख बताता है कि कविताएँ पढ़ाने का पारम्परिक तरीक़ा विद्यार्थी को कवि के जीवन और कविता के समय से बाँध देता है। प्रसंग और सन्दर्भ के साथ कविता को समझने का दशकों पुराना यह ढंग उनके कविता से जुड़ने के मौक़े कम कर देता है, और कविता को यांत्रिक तरीक़े से पढ़ने की ओर ले जाता है। लेखक बताते हैं कि कवि कविता के माध्यम ‘से’ नहीं, बल्कि कविता ‘में’ कहना चाहता है। वे यह भी कहते हैं कि विद्यार्थी कविता को अपना बना सकें, अपने देश-काल-परिस्थिति के मुताबिक़ उसे समझ सकें, यह आज़ादी कविता पढ़ते-पढ़ाते हुए होनी चाहिए।

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