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जीवन के लिए, जीवन के माध्यम से शिक्षा - भाग एक

प्रसाद, देवी

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
औपनिवेशिक राज के दौरान अँग्रेज़ों ने किस प्रकार भारत की स्थापित शिक्षा व्यवस्था, उद्योग, कृषि व स्‍थानीय परम्‍पराओं और संस्‍थाओं को नष्‍ट कर भारत को मानसिक रूप से गुलाम बनाए रखने के लिए क्‍या दूरगामी रणनीतियाँ बनाईं थीं, उनके बारे में इस लेख में चर्चा है। लेखक ने एशियाई देशों के साहित्‍य प्रति ब्रिटिश राज के दृष्टिकोण, शिक्षा से सम्‍बन्धित गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका के अनुभवों व भारत में उनके शिक्षा से सम्‍बन्धित प्रयोगों पर भी प्रकाश डाला है। लेख में इस बात का जिक्र भी है कि गुजरात विद्यापीठ की स्‍थापना कैसे हुई और आगे चलकर कैसे अन्य राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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