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भेदभाव और बहिष्करण का ख़ात्मा : ‘सद्भावना विद्यालय’ की ओर
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About this book
लेख में लेखिका मुख्यतया सीखने को बेहतर बनाने, बच्चों को वर्तमान में तथा आगे वयस्कों के रूप में कामयाबी हासिल करने में मदद के लिए, स्कूलों में समानुभूति और समानता का माहौल बनाने पर ज़ोर देती हैं। वे इंगित करती हैं कि स्कूल में बच्चों को कक्षा की तमाम गतिविधियों, खेल के मैदान और रोज़ की सभा में शामिल करते हुए उनके साथ बराबरी का व्यवहार करना और उनकी स्वतंत्र सोच और राय का सम्मान करना ज़रूरी है। साथ ही वे स्वीकार करती हैं कि बतौर शिक्षक हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम बच्चों के भीतर सहानुभूति, समानुभूति और मैत्री की भावना भरें जिससे वृद्धि और विकास सुनिश्चित होंगे।
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