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विज्ञान में पूर्वनिर्मित मानसिक प्रतिरूपों को चुनौती देना

पुरन्‍दरे, अनघ

FormatEbook
Published2017
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
अपने रोज़मर्रा के अनुभवों से बच्चे जो अर्थ निकालते हैं या अनुमान लगाते हैं, क्या वे सभी वैज्ञानिक सत्य होते हैं? इस लेख में तीन ऐसे उदाहरणों की चर्चा की गई है जो दिखाते हैं कि किस तरह कक्षाओं में प्रवेश करने से पहले ही बच्चों के पास ‘पूर्वनिर्मित मानसिक प्रतिरूप’ होते हैं और किस तरह वे वयस्क अवस्था तक भी बने रह सकते हैं। कुछ ऐसे सम्भावना पूर्ण तरीक़ों की भी चर्चा है जो सीखने वालों को इन ‘पूर्वनिर्मित मानसिक प्रतिरूपों’ को सही वैज्ञानिक प्रतिरूपों के द्वारा विस्थापित करने में मदद करेंगे।

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