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बंसोड, बाँस और लोकतंत्र
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About this book
उत्तर प्रदेश में कम-से-कम चार जातियाँ - धरकार, बंसोड़, बंसफोर और डोम ऐसी हैं जिनका जीवन बाँस पर निर्भर करता है। कुछ समय पहले तक इन जातियों को बाँस आसानी से मिल जाता था, इसलिए उनके सामने जीविका का संकट इतना गहरा नहीं था, लेकिन आज इन जातियों के सामने जीविका ही नहीं बल्कि अस्तित्व का संकट भी खड़ा हो गया है। यह संकट यकायक उत्पन्न नहीं हुआ है। इन समुदायों की घोर ग़रीबी और वंचना के सूत्र राज्य के ढाँचे और उसकी परियोजनाओं में ढूँढे़ जाने चाहिए। प्रस्तुत लेख में यही समझने का प्रयास किया गया है कि बाँस के इन कारीगरों की वर्तमान नियति गढ़ने में जाति-विमर्श, लोकतंत्र तथा विकास की वृहत्तर संरचनाओं की क्या भूमिका रही है।