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Cover of क्या हम वास्तव में राष्ट्रवादी हैं?

क्या हम वास्तव में राष्ट्रवादी हैं?

प्रेमचन्द,

FormatEbook
Published1934
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सामाजिक, सांस्कृतिक और राजकीय मूल्यों के साथ ‘राष्ट्रवाद’ की अवधारणा में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। लेखक ने यहाँ राष्ट्रवादी आन्दोलन और उस समय के सामाजिक-राजनीतिक मूल्यों के बदलावों को ध्यान में रखते हुए व्यापक रूप में ‘राष्ट्रवाद’ की अवधारणा को फिर से गढ़ने की कोशिश की है। आधुनिक शिक्षा और विचारों के साथ-साथ पाश्चात्य विचारों को ग्रहण करते हुए देशी समस्याओं जैसे जातिवाद, साम्प्रदायिकता, अन्धश्रद्धाओं, सामन्ती शोषण को हल करने और राष्ट्रवाद की अवधारणा को अधिक विस्तृत करने के ईमानदार प्रयास लेख में झलकते हैं।

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