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भय व आशा के साथ
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About this book
अतीत में हुई विभिन्न घटनाओं को याद करते हुए लेख अपने वर्तमान यानी 2008 के घटनाक्रमों विशेषकर आतंकी हमलों और साम्प्रदायिक हिंसा की चर्चा करता है। इंडियन मुजाहिदीन तथा चरमपन्थी हिन्दू संगठनों की हिंसक वारदातों और आर्थिक संकटों के बावजूद जनता की एकजुटता तथा संकटों से जूझने के उसके साहस को लेखक उम्मीद की नज़र से देखता है।