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शिक्षा: 'हिन्‍द स्वराज' से अंश

गाँधी, महात्मा

FormatEbook
Published2008
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख महात्मा गाँधी की चर्चित पुस्तक 'हिन्‍द स्वराज' का एक अंश है जिसमें वे शिक्षा पर अपने विचार व्यक्त करते हैं। गाँधी का मानना है कि अँग्रेज़ी शिक्षा से भारतीयों को कुछ हासिल नहीं होने वाला। विकल्प सुझाते हुए गाँधी नैतिक गुणों का विकास करने वाली; सामाजिक आचरण के प्रति उत्तरदायित्व पैदा करने वाली; ज्ञान और श्रम में समन्वय वाली शिक्षा पर ज़ोर देते हैं।

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