Home › History › ज्ञात के ज़रिए अज्ञात को समझने की तीसरी दृष्टि : महिषासुर विमर्श पर बहस - प्रति उत्तर
ज्ञात के ज़रिए अज्ञात को समझने की तीसरी दृष्टि : महिषासुर विमर्श पर बहस - प्रति उत्तर
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख फुले-आम्बेडकरी दृष्टि से महिषासुर विमर्श में अब तक पेश किए गए विचारों की समीक्षा करता है। लेख मिथकों के बारे में हुई सर्वाधिक स्वीकृत खोजों और स्थापनाओं के माध्यम से मिथकों की खासियतों और विचित्रता को सामने रखता है। लेख मिथकों के पाठ को खोलता है और पुनर्पाठ के ज़रिये उनके लक्ष्यों व प्रभावों को प्रकट करता है। लेख भारतीय इतिहास के लेखन व दृष्टि की समस्याओं के वर्णन के साथ, इतिहास-बोध के प्रश्न को सामने लाता है। लेखक यहाँ ब्राह्मणवाद द्वारा सुविचारित व संगठित रूप से न्याय-बोध, तर्क-बोध व इतिहास बोध को प्रभावित करने वाली समझ को प्रस्तुत करता है।
More in History
Browse all →
Камено доба
Jovan Zujovic
A Bakony (1. kötet)
Károly Eötvös
The Sketch-Book of Geoffrey Crayon
Washington Irving
Bullets & Billets
Bruce Bairnsfather
My First Visit to New England, and Others (from Literary Friends and Acquaintance)
William Dean Howells
Tine
Herman Bang
Cicero
W. Lucas (William Lucas) Collins
Personal Memoirs of P. H. Sheridan, General, United States Army — Complete
Philip Henry Sheridan